8 आयुर्वेदिक घरेलू उपचार जो बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं

पिछले कुछ महीनों में हमारे देश की ऐसी स्थिति रही है कि हम सोच भी नहीं सकते कि उस बच्चे और उसके माता-पिता के लिए हर समय उस सपोर्ट सिस्टम पर हो और उसको सहन कर रहा हो।

इस COVID-19 लहर ने पूरे भारत को अपने चपेट में ले लिया है और इस कारण से कई लोगों की जान चली गई है। वयस्कों की तुलना में बच्चों में संवेदनशील श्वसन प्रणाली होती है इसलिए उन्हें भी कोरोना से काफी खतरा होता है खास कर के कोरोना की दूसरी लहर में।

कोरोना वायरस एक ऐसी बीमारी है जिससे हमें अलग-थलग रहकर एक साथ लड़ने की जरूरत है। ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि हम लोग अपनी प्रतिरक्षा का निर्माण करें। तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे आयुर्वेदिक उपाय जो बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

8 आयुर्वेदिक उपचार जो बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं

हल्दी और शहद

हल्दी और शहद दोनों ही सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। हल्दी का उपयोग सूजन को कम करने और वायरस से लड़ने के लिए ऊर्जा प्रदान करने में भी किया जाता है।

एक चौथाई टेबल स्पून हल्दी लें और इसमें आधा टेबल स्पून शहद मिलाएं। यह बच्चों को सोने से पहले दिया जाये तो फायदेमंद होता है। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है।

अदरक, तुलसी और शहद

अदरक की चाय और अन्य उत्पादों को अक्सर वयस्कों को फ्लू, खांसी और बुखार जैसी बीमारियों में उपचार के रूप में दिया जाता है। यह एक प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर है।

आधा चम्मच तुलसी के पत्तों के रस में शहद और 5 बूंद अदरक के रस को मिलाकर एक मिश्रण बना कर सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। यह बच्चों को सुबह के समय खाली पेट देना अधिक फायदेमंद है।

गुड़

गुड़ एक प्राकृतिक मिठाई जैसा है। इसे गन्ने से निकाला जाता है। यह एक स्वादिष्ट होता है जिसे कोई भी खा सकता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।

गुड़ को किसी भी समय आहार में शामिल किया जा सकता है। सुबह से दोपहर तक इसका सेवन करने का सबसे अच्छा समय है। यह तुरंत ऊर्जा देता है। 

नीम के पत्ते

नीम अपने एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से इम्यूनिटी बढ़ाता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है। यह विषहरण करता है और रक्त से अशुद्धियों को दूर करता है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बच्चो को नीम के 2 पत्ते हफ्ते में तीन बार चबाने के लिए देना फायदेमंद हैं।

दूध का काढ़ा

बच्चों को सोने से पहले दूध पिलाया जाता है। इससे कफ और खांसी हो सकती है क्योंकि दूध कफ में वृद्धि का कारण बनता है। इसलिए खांसी  को कम करने के लिए कुछ जड़ी-बूटियों के साथ उबला हुआ दूध दिया जा सकता है।

ऐसे काढ़े को बनाने के लिए दूध में दालचीनी, इलायची, लौंग, काली मिर्च और पीपल के पत्ते मिलाए जा सकते हैं। हल्दी वाला दूध भी एक अच्छा विकल्प है।

 घी

अक्सर स्वास्थ्य व पोषण विशेषज्ञ घी के स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताते हैं। यह ओमेगा 3 फैटी एसिड का एक समृद्ध स्रोत है। घी को एक स्वस्थ वसा माना जाता है जिसकी हमारे आहार में प्रतिदिन एक निश्चित मात्रा में आवश्यकता होती है।

यह पाचन में सहायता करता है और इसमें डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं। ओमेगा -3 फैटी एसिड की उपस्थिति बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का एक बड़ा कारक है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी ऑक्सीडेंट भी होते हैं जो इसे बच्चों के लिए जरूरी हैं।

आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन

आयुर्वेद में हरिद्रा खंड और च्यवनप्राश दो सबसे अधिक लोकप्रिय प्रतिरक्षा बूस्टर हैं। यह बच्चों की प्रतिरक्षा को बढ़ा सकता है और उन्हें मजबूत कर सकता है। इसे दूध के साथ एक चम्मच लिया जा सकता है। यह लाभकारी जड़ी बूटियों के द्वारा बनाया जाता है जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है

अश्वगंधा

यह आयुर्वेद की अनमोल जड़ी बूटियों में से एक है। इसके नाम से संकेत मिलता है कि यह घोड़े की गंध की तरह है। इसकी जड़ों और पत्तियों से इसका अर्क (पाउडर) स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

यह शुगर, कोर्टिसोल स्तर, अवसाद के लक्षणों और सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। अश्वगंधा मांसपेशियों को मजबूत करता है और मस्तिष्क के कार्य में भी सुधार करता है। इसलिए यह बच्चों के लिए भी बहुत अच्छा होता है।

आयुर्वेदिक उपचार बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं क्योंकि ये प्राकृतिक होते हैं। ये उत्पाद और घरेलू उपचार बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ाते हैं।

तुलसी, हल्दी, शहद, घी आदि हमारे घरेलू कामों में बहुत आम हैं और हम अक्सर इसका वास्तविक लाभ जाने बिना इसका इस्तेमाल करते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इन घरेलू नुस्खों को आजमाएं।

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