कैंसर रोगियों के लिए एक बेहद असरदार दवा की खोज हो गई, जो मिचली को रोकने व जान बचाने में है मददगार

आज के दौर में कैंसर दुनिया के एक बेहद खतरनाक बीमारी बन गई है। आंकड़ों के अनुसार हर साल दुनिया भर में 66 लाख से भी ज्यादा लोग कैंसर जैसी बीमारी की चपेट में आते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार 0 से 19 साल के आयु वर्ग के तीन लाख से ज्यादा लोगों का अब तक कई तरह के कैंसर का निदान किया जा चुका है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि कैंसर आज पूरी दुनिया के लिए एक वैश्विक चुनौती का कारण बन गया है।

कैंसर का इलाज महंगा होने के साथ-साथ बेहद कठिन होता है। यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को सही समय पर इस बीमारी का इलाज नहीं मिल पाता है।

सही इलाज ना मिल पाने की वजह से लोग असमय इस दुनिया को छोड़ कर चले जाते हैं। इस समस्या को लेकर शोध चल रहा था अब वैज्ञानिकों की एक टीम ने कैंसर के इलाज से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण खुलासा किया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि कैंसर की सर्जरी के दौरान जिन रोगियों को मिचली (उल्टी) की दवा दी जाती है उनमें मृत्यु के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि आज तक अग्नाशय और अन्य दूसरे प्रकार के कैंसर के रोगियों पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है। शोध के निष्कर्ष को ऐंथीसियोलॉजी 2021 की एक बैठक में भी शोधकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किया गया।

डेक्सामेथासोन कैंसर में लाभदायक

शोध में पाया गया कि कैंसर के रोगियों को यदि डेक्सामेथासोन नामक दवा दी जाए तो उन्हें मृत के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। शोध में पाया गया कि कैंसर के जिन रोगियों को सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी के दौरान यह दवा दी जाती है उनमें जान जाने का खतरा कम रहता है।

यह दवा नॉन इम्युजेनिक कैंसर इमेजेस (जो एक मजबूत सबसे अच्छा प्रतिक्रिया को) उत्तेजित नहीं करता जैसे की स्तन, अंडाशय, थायराइड आदि। यह रोगी की सर्जरी के बाद उनके जीवनकाल को बढ़ा सकता है।

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन मरीजों को सर्जरी के दौरान यह दवा नही दी गई थी उन मरीजों में सर्जरी के दौरान या फिर सर्जरी के बाद मृत्यु का खतरा अधिक था।

शोध में मिली यह जानकारी

इस शोध में पाया गया कि कैंसर के रोगियों की जान कैसे बचाई जा सकती है। इसके लिए शोधकर्ताओं ने 74058 रोगियों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इन रोगियों कक साल 2005 से 2020 के दौरान महान कैंसर ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी कराई गई थी।

इनमें से 34% रोगियों को सर्जरी के दौरान डेक्सामेथासोन दवा दी गई थी। सर्जरी के 90 दिन बाद पाया गया कि जिन लोगों को यह दवा दी गई थी उनमें मात्र 0.83% रोगियों के ही मृत्यु हुई। जबकि जिन रोगियों को यह दवा नहीं दी गई थी मन मृत्यु का प्रतिशत 3.2% था।

इस आधार पर वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि यह दवा कैंसर के रोगियों को दे जाए तो यह उनकी जान बचाने में काफी मददगार साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों की राय

सेंटर फॉर एनेस्थीसिया रिसर्च एक्सीलेंस और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक मैक्सिमिलियन सेफर का मानना है कि यह दवा कैंसर के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। इस दवा का इस्तेमाल सावधानी बरतने के लिए भी बेहद आवश्यक है।

इस दवा के प्रयोग के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। यह दवा कैंसर के विकास को रोकता है। लेकिन दूसरी तरफ से यह प्रतिरक्षा प्रणाली को भी कमजोर कर देता है।

शोध में यह पता चला है कि कैंसर (जिस प्रकार में प्रतिरक्षा प्रणाली के ज्यादा भूमिका नहीं होती है) उसमें इस दवा का इस्तेमाल करके रोगियों की जान बचाई जा सकती है।

शोध का निष्कर्ष

शोध को लिखने वाले डॉ मैक्सिमिलियन का कहना है कि अपने शोध के निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं कि यह कैंसर के इलाज में काफी उपयोगी साबित होने वाला है। हमारे डाटा के आधार पर डॉक्टरों को कैंसर की सर्जरी कराने वाले रोगियों को यह दवा जरूर देनी चाहिए।

यह दवा उल्टी की समस्या को कम करने में मददगार तो होता ही है साथ ही इसका असर रोगियों के जीवनकाल पर भी देखने को मिलता है। इम्यूनोजेनिक कैंसर इस दवा को किस प्रकार से अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है इस संदर्भ में अभी और ज्यादा शोध करने की जरूरत है।

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