वैक्सीन की दोनों डोज लेने वालों पर भी ओमिक्रोन का खतरा

इन दिनों देशभर में कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रोन तेजी से फैल रहा है। यह वायरस भारत समेत पूरी दुनिया में फैल गया है। जिसकी वजह से कई देशों ने अपने देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा को बंद कर दिया है तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर रोक लगा दी है।

अब इस नए वेरिएंट के संबंध में नई जानकारी सामने आई है। कहा जा रहा है कि कोरोनावायरस के इस वैरीअंट पर कोरोना वायरस की वैक्सीन की दो डोज पर्याप्त नहीं है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब तक लोगों को इस तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा?

अभी हाल में ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा ओमिक्रोन पर वैक्सीन से जुड़े असर पर शोध किया गया है। जिसमें चिंताजनक बात सामने आई है। इस शोध की रिपोर्ट को सोमवार को प्रकाशित किया गया।

जिसमें ओमिक्रोन के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन वैक्सीन की दोनो डोज ले चुके लोगों पर शोध किया गया है।

ओमिक्रोन के खिलाफ वैक्सीन के दो डोज प्रभावशाली नहीं है। ऐसे में कोरोना वायरस वैक्सीन की दोनो डोज ले चुके लोगों पर कम एंटीबॉडी होने की वजह से दोबारा से संक्रमण होने का खतरा बढ़ गया है।

शोध में यह भी बताया है कि ऐसे लोगों को सतर्क रखना चाहिए। बता दें कि यह शोध एस्ट्रोजेनका की दो डोज ले चुके लोगों के ब्लड सैंपल को इकट्ठा करके किया गया है।

इसमें वैक्सीनेटेड लोगों के खून के सैंपल की जांच की गई है और पाया गया है कि इन लोगों में कोरोना वायरस के नए वैरियंट ओमिक्रोन से लड़ने शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी नहीं बन पाई है अर्थात एंटीबॉडी की कमी पाई गई है।

ओमिक्रोन के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का शोध

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में शोध किया गया है। इस वायरस पर वैक्सीन की प्रभावशाली तक सवाल उठ रहे थे। इस शोध के तहत फाइजर वैक्सीन और एस्ट्रोजेनिका वैक्सीन की दो डोज जिन लोगों को दी गई है उन पर शोध किया गया है।

शोध के लिए दोनों डोज ले चुके लोगों का ब्लड सैंपल एकत्रित किया गया और ओमिक्रोन के साथ उस पर परीक्षण किया गया। शोध में पाया गया डेल्टा वैरीअंट की तुलना में दोनों डोज ले चुके लोग ओमिक्रोन से बचाव करने में काफी कमजोर है।

ऐसे में दोनों वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षाओमिक्रोन के लिए पर्याप्त नहीं है। टीका लगवा चुके लोगों के ब्लड सैंपल का जब अध्ययन किया गया तो पाया गया कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए एंटीबॉडी में गिरावट आई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

बूस्टर डोज की जरूरत

अब बूस्टर डोस की जरूरत बढ़ रही है। कोरोनावायरस के नए वैरीअंट पर वैक्सीन का असर कम होने की वजह से बूस्टर डोज की मांग की जा रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोनावायरस इनके बूस्टर डोस की जरूरत महसूस की जा रही है।

हेल्थ केयर सिस्टम पर बढ़ जाएगा बोझ

ऑक्सफोर्ड मेडिकल के प्रमुख प्रोफेसर और इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता गेविन स्क्रीटर का कहना है कि यह आंकड़े वैक्सीन को विकसित करने और कोरोनावायरस की रक्षा करने की रणनीति पर काम करने में मददगार साबित होंगे।

ऐसे में बूस्टर टीकाकरण की मांग करना उचित है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण करवा चुके लोगों में कोरोनावायरस की वजह से गंभीर बीमारी या मृत्यु के जोखिम में वृद्धि का फिलहाल कोई सबूत नहीं पाया गया है। लेकिन फिर भी हमें सतर्क रहना चाहिए क्योंकि अधिक संख्या में अब स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने वैक्सीन की दूसरी खुराक के बाद एंटीबॉडी की निष्क्रियता पर भी शोध किया है। लेकिन उन्होंने सेलुलर इम्यूनिटी के बारे में कोई भी रिकॉर्ड जानकारी नहीं दी है।

उन्होंने कहा कि अभी इसके लिए सैंपल एकत्र कर लिया गया है। लेकिन अभी इस पर परीक्षण किया जाना है। परीक्षण के बाद ही इसके बारे में जानकारी दी जाएगी।

नोट अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें और स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। कोरोनावायरस के लिए बनाए गए सभी नियमों एवं गाइडलाइन का पालन करें तथा दूसरों से भी पालन करवाएं।

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